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Saturday, 4 February 2012

इस्लामको स्वर्णयुग

इस्लामको स्वर्णयुग (७५०-१२५८)

इबन रशुद, जसले दर्शनशास्त्रमा इबनरशुवाद सृजना गरे।
उम्मयद वंश ७० साल तक सत्तामा रहा र इस समयमा उत्तरी अफ्रीका, दक्षिण यूरोप, सिन्ध र मध्य एशिया के धेरै हिस्सों पर उनका कब्जा हो गया। उम्मयद वंश के बाद अब्बासी वंश ७५०मा सत्तामा आया। शिया र अजमी मुसलमानों ने (वह मुसलमान जो कि अरब नहीं थिए) अब्बासियोंको उम्मयद वंश के खिलाफ विद्रोह करनेमा बहुत सहायता की। उम्मयद वंश की एक शाखा दक्षिण स्पेन र कुछ र क्षेत्रों पर सिमट कर रह गयी। केवल एक इस्लामी सम्राज्य की धारणा अब समाप्त होने लगी।
अब्बासियों के राजमा इस्लाम का स्वर्ण युग शुरु हुआ। अब्बासी खलीफा ज्ञानको बहुत महत्त्व देते थिए। मुस्लिम दुनिया बहुत तेजी देखि विशव का बौद्धिक केन्द्र बनने लगी। धेरै विद्वानों ने प्राचीन युनान, भारत, चीन र फारसी सभय्ताओं की साहित्य, दर्शनशास्र, विज्ञान, गणित इत्यादी देखि संबंधित पुस्तकों का अध्ययन किया र उनका अरबीमा अनुवाद किया। विशेषज्ञों का मानना छ कि इस के कारण बहुत बडा ज्ञानकोष इतिहास के पन्नोंमा खोने देखि रह गया।[७] मुस्लिम विद्वानों ने सिर्फ अनुवाद नैं नहीं किया। उन्होंने इन सभी विषयोंमा अपनी छाप पनि छोडी।
चिकित्सा विज्ञानमा शरीर रचना र रोगों देखि संबंधित धेरै नई खोजें हूईं जैसे कि खसरा र चेचक के बीचमा जो फर्क छ उसे समझा गया। इबने सीना (९८०-१०३७) ने चिकित्सा विज्ञान देखि संबंधित धेरै पुस्तकें लिखीं जो कि आगे जा कर आधुनिक चिकित्सा विज्ञान का आधार बनीं। यस कारण इबने सीनाको आधुनिक चिकित्सा का पिता पनि कहा जाता छ।[८][९] इसी तरह देखि अल छथामको प्रकाशिकी विज्ञान का पिता र अबु मूसा जबीरको रसायन शास्त्र का पिता पनि कहा जाता छ।[१०][११] अल ख्वारिज्मी की किताब किताब-अल-जबर-वल-मुकाबला देखि नैं बीजगणितको उसका अङ्ग्रेजी नाम मिला। अल ख्वारिज्मीको बीजगणित की पिता कहा जाता छ।[१२]
इस्लामी दर्शनशास्त्रमा प्राचीन युनानी सभय्ता के दर्शनशास्रको इस्लामी रङ्ग देखि विकसित किया गया। इबने सीना ने नवप्लेटोवाद, अरस्तुवाद र इस्लामी धर्मशास्त्रको जोड कर सिद्धांतों की एक नई प्रणाली की रचना की। इससे दर्शनशास्रमा एक नई लहर पैदा हूई जिसे इबनसीनावाद कहते छन्। इसी तरह इबन रशुद ने अरस्तू के सिद्धान्तहरु लाई इस्लामी सिद्धांतों देखि जोड कर इबनरशुवादको जन्म दिया। द्वंद्ववाद की मदद देखि इस्लामी धर्मशास्त्र का अध्ययन करने की कलाको विकसित किया गया। इसे कलाम कहते छन्। मुहम्मद साहब के उद्धरण, गतिविधियां इत्यादि के मतलब खोजना र उनसे कानून बनाना स्वयँ एक विषय बन गया। सुन्नी इस्लाममा इससे विद्वानों के बीच मतभेद हुआ र सुन्नी इस्लाम कानूनी मामलोंमा ४ हिस्सोंमा बट गया।
राजनैतिक तौर पर अब्बासी सम्राज्य विस्तारै धीरे कमजोर पडता गया। अफ्रीकामा धेरै मुस्लिम प्रदेशों ने ८५० तक आफैको लगभग स्वतन्त्र कर लिया। ईरानमा पनि योी हाल हो गया। सिर्फ कहनेको यो प्रदेश अब्बासियों के अधीन थिए। महमूद गजनी (९७१-१०३०) ने आफैको तो सुल्तान पनि घोषित कर दिया। सल्जूक तुरकों ने अब्बासियों की सेना शक्ति नष्ट करनेमा अहम भूमिका निभाई। उन्होंने मध्य एशिया र ईरान के धेरै प्रदेशों पर राज किया। हालांकि यो सभी राज्य आपसमा युद्ध पनि करते थिए पर एक नैं इस्लामी संस्कृति होने के कारण आम लोगोंमा बुनियादी संपर्क अभी पनि नहीं टूटा था। इस का कृषिविज्ञान पर बहुत असर पडा। धेरै खेतिहरु लाई नई ठाँउ ले गएर बोया गया। यो मुस्लिम कृषि क्रांति कहलाती छ।

हजरत मुहम्मद

हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम(५७०-६३२)को मक्काको पहाडियमा परम ज्ञान ६१०को आसपासमा प्राप्त भएको थियो। जब उनले उपदेश दिन आरंभ गरे तब मक्काका समृद्ध मानिसहरुले यसलाई आफ्नो सामाजिक र धार्मिक व्यवस्था माथि खतरा सम्झीए र उनको विरोध हुन् थाल्ल्यो। अंतमा ६२२ मा उनले आफ्नो अनुयायिहरुको साथ मक्काबाट मदीनाको प्रस्थान गर्नु पर्‍यो। यस यात्रालाई हिजरत भनिन्छ र यहिबाट इस्लामी कैलेंडरको शुरुवात हुन्छ। मदीनाका मानिसहरुको जिंदगी आपसी लडाईबाट कष्टकर जस्तो थियो र हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लमको संदेशहरु उनीहरुले त्यहा धेरै लोकप्रिय बनाई दिए। ६३० मा हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लमले आफ्नो अनुयायिहरुको साथ एक संधिको उल्लंघन भएको कारण मक्का माथि चढाई गरीदिए। मक्कावासिहरुले आत्मसमर्पण गरेर इस्लाम स्वीकार गरे। मक्कामा स्थित काबा लाई इस्लामको पवित्र स्थल घोषित गरीदिए । ६३२ मा हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लमको देहांत भयो। तर उनको मृत्युसम्म इस्लामको प्रभावबाट अरबको सबै जनजाती एक राजनैतिक र सामाजिक सभ्यताको भाग बनेका थिए। यस पछि इस्लाममा खिलाफतको सिलसिला शुरु भयो।